ऊरूज या छंद
दोस्तों ग़ज़ल के ऊरूज या छंद से डरने की जरूरत नहीं है | पहले हम जान लें की दोहा लिखने हेतु किस छंद का पालन करना होता है | तेरे मन पहुँचीं नहीं , मेरे मन की बात नाहक हमने थे लिए , साजन फेरे सात अब देखें की दोहे के चार चरण या खंड होते हैं तेरे मन पहुंची नहीं / यहपहला चरण है इसमें १३ मात्र होती हैं व् इसका अंत गुरू पर होता है यहाँ नहीं का हीं गुरू है | मेरे मन की बात यहाँ अंत लघु पर होता है यथा बात का त, कुछ और भी बातें हैं दोहे में पर अभी इतनी ही | अब देखे भाई नीरज गोस्वामी ने कल के लेख में कहा की यह फाइलातुन समझ नहीं आता तो गजल के रुक्न या खंडो को समझने के लिए हम इन खंड शब्दों के समकक्ष मात्रवाले शब्दों का सहारा ले लें फिर इन पर बात करेंगे | समझें रुक्नों के समकक्ष हिन्दी शब्द कुछ मित्र ,गज़ल छंद में प्रयुक्त फ़ारसी शब्दावली से घबरा जाते हैं उनके लिये रुक्नो [खण्डों] में हम ये समकक्ष शब्दावली दे रहे हैं केवल छंद के ध्वनि रूप को ्समझने हेतु है,हम कोई नई शब्दवली गढ़्ने का प्रयास नहीं कर रहे।आगे चलकर केवल उर्दू रुक्न भी दिये जा रहे हैं वज्न सहित फ़ अल= च...