कठिन है पर सफर तो है

मापनी
1212 1212

कठिन है पर सफ़र तो है
नहीं है कुछ सफर तो है

छोटा सही एक ख़ाब है
चलने को एक डगर तो है

हवा हवा नही रही
हवा में कुछ ज़हर तो है

चलो चलें मेरे यहाँ
खुली हवा नहर तो है

असर में भी असर नही
असर में कुछ कसर तो है

तेरा नही है गम हमे
कलम तो है बहर तो है

जो कह रहे भला बुरा
उन्हें भी पर फ़िकर तो है

है लाश जैसे चल रही
कहने को ये शहर तो है

मिटा दो तुम मिटा दे हम
हा दिल में एक रबर तो है

मिले मिले कि ना मिले
ये सोच हर पहर तो है

जो सब लिखें वो क्यूँ लिखूं
नवाब कुछ मगर तो है

अविनाश कुमार 'नवाब'



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