ठीक था निभा

ठीक था निभा  रस्में जहाँ  पागल हुआ हूँ
हो रहा जहाँ और बोले मै  पागल हुआ हूँ
212 1222 1222 122
212  1222 1222 122


बात होती है खत्म चली हो कहीं से
ठहरी है कहानी जहां मै वही पल हुआ हूँ


हो कोई भी क्यूँ गुनाहगार मेरी मौत का
मैं तुझे चाहता था खुद का कातिल हुआ हूँ



तुम जो इंतज़ार की बात करते हो तो सुनो
मैं आज था पहले  इंतज़ार में कल हुआ हूँ

मैं मरूँ और मर ही जाऊं ऐसा भी  नही है
ऐसी चार मौतों  से रोज ही घायल हुआ हूँ

ख्याल क्या क्या ना आते कर गुजरने  को
क्या क्या ही जाने कर रहा पागल हुआ  हूँ
2122 2122 122 2
2122 2122

याद का काम  है आना सो  चली  आती है
बरसना चाहता हूं यादों  का बादल हुआ हूँ










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